US News ट्रंप की मुस्लिम देशों संग बड़ी बैठक: गाजा युद्ध पर वैश्विक शांति की कवायद तेज

US News ट्रंप की मुस्लिम देशों संग बड़ी बैठक: गाजा युद्ध पर वैश्विक शांति की कवायद तेज
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मुस्लिम देशों के नेताओं के साथ गाजा युद्ध को लेकर एक अहम बहुपक्षीय बैठक की। इस बैठक में तुर्की, कतर, सऊदी अरब, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और जॉर्डन के राष्ट्राध्यक्षों ने हिस्सा लिया। बैठक का मकसद गाजा में जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए संभावित राजनीतिक, कूटनीतिक और मानवीय विकल्पों पर चर्चा करना था।
ट्रंप ने इस मुलाकात को अपनी “सबसे महत्वपूर्ण बैठक” बताते हुए गाजा में युद्ध खत्म करने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, “आज की कई मीटिंग्स में यह सबसे अहम है। हम गाजा में जारी युद्ध को जल्द से जल्द खत्म करने की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे।”
गाजा युद्ध और वैश्विक चिंता
गाजा पट्टी में लंबे समय से जारी संघर्ष ने हजारों जिंदगियों को प्रभावित किया है। इजरायल और हमास के बीच युद्ध ने मध्य पूर्व की स्थिरता को गहराई से हिला दिया है। ऐसे समय में जब यूक्रेन युद्ध पहले से ही वैश्विक तनाव को बढ़ा रहा है, दुनिया की नजर इस पर थी कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में क्या कोई ठोस समाधान निकल पाएगा।
इसी परिप्रेक्ष्य में ट्रंप ने मुस्लिम देशों के नेताओं के साथ विशेष बैठक की। इसमें शामिल देशों ने न केवल युद्धविराम (Ceasefire) बल्कि क्षेत्र में लंबे समय तक स्थिरता कायम करने की दिशा में सहयोग पर सहमति जताई।
कतर का भरोसा और अरब देशों की अपेक्षा
बैठक के दौरान कतर के अमीर शेख तमीम ने ट्रंप का आभार जताते हुए कहा कि अरब देश युद्ध को समाप्त करने के लिए उन पर भरोसा कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम यहां केवल एक मकसद से आए हैं—युद्ध रोकना और बंधकों की वापसी सुनिश्चित करना। हम गाजा के लोगों की मदद और संघर्ष खत्म करने के लिए आपके नेतृत्व पर भरोसा करते हैं।”
यह बयान इस ओर इशारा करता है कि अरब देशों ने ट्रंप को मध्यस्थता की भूमिका में स्वीकार किया है, जबकि इजरायल की आक्रामक रणनीति और हमास की जिद दोनों ही शांति प्रक्रिया को कठिन बना रही हैं।
ट्रंप का संयुक्त राष्ट्र में सख्त संदेश
बैठक से पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए अपने संबोधन में ट्रंप ने हमास को “शांति बहाल करने के उचित प्रस्तावों को अस्वीकार करने” के लिए सीधे जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने चेतावनी दी कि लगातार संघर्ष का रास्ता अपनाने वाले आतंकवादी संगठनों को किसी भी तरह का इनाम नहीं दिया जा सकता।
ट्रंप ने कहा, “हम 7 अक्टूबर को नहीं भूल सकते। इस निकाय के कुछ सदस्य एकतरफा फिलिस्तीनी राज्य की मान्यता की मांग कर रहे हैं। यह हमास के आतंकवादियों के लिए पुरस्कार जैसा होगा। जो शांति चाहते हैं, उन्हें एकजुट होकर कहना होगा—बंधकों को तुरंत रिहा करो।”
फिलिस्तीनी राज्य की मान्यता पर विवाद
गौरतलब है कि हाल ही में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, पुर्तगाल और यूनाइटेड किंगडम सहित 10 देशों ने औपचारिक रूप से फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी है। ट्रंप ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि यह शांति प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा सकता है। उनका मानना है कि ऐसे कदम इजरायल और फिलिस्तीन के बीच तनाव को और भड़का देंगे।
बैठक के नतीजे और भविष्य की राह
हालांकि बैठक के बाद ट्रंप ने पत्रकारों से विस्तृत बातचीत नहीं की, लेकिन उन्होंने इसे “बहुत सकारात्मक मुलाकात” बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुलाकात गाजा युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ी पहल साबित हो सकती है।
जहां एक ओर इजरायल लगातार सैन्य कार्रवाई पर जोर दे रहा है, वहीं मुस्लिम देशों की यह बैठक इस बात का संकेत देती है कि क्षेत्रीय शांति की राह अब अमेरिका की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करेगी।
डोनाल्ड ट्रंप की यह बैठक केवल कूटनीतिक पहल नहीं, बल्कि गाजा युद्ध से प्रभावित लाखों लोगों की उम्मीदों से भी जुड़ी है। मुस्लिम देशों का समर्थन और अमेरिकी नेतृत्व की सक्रियता मिलकर अगर कोई ठोस समाधान निकालते हैं तो यह न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरे विश्व के लिए राहत की खबर होगी।
फिलहाल, सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि ट्रंप और मुस्लिम देशों की इस “महाबैठक” से क्या ठोस कदम निकलते हैं। क्या गाजा युद्ध थमेगा? क्या शांति का नया अध्याय शुरू होगा? आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा।



















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