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ECL में वित्तीय संकट गहराया: कर्मचारियों के वेतन पर संकट, अक्टूबर की सैलरी देरी से मिली, नवंबर का अब तक इंतज़ार

ECL में वित्तीय संकट गहराया: कर्मचारियों के वेतन पर संकट, अक्टूबर की सैलरी देरी से मिली, नवंबर का अब तक इंतज़ार

ECL में वित्तीय संकट गहराया: कर्मचारियों के वेतन पर संकट, अक्टूबर की सैलरी देरी से मिली, नवंबर का अब तक इंतज़ार

ECL में वित्तीय संकट गहराया: कर्मचारियों के वेतन पर संकट, अक्टूबर की सैलरी देरी से मिली, नवंबर का अब तक इंतज़ार

ECL में वित्तीय संकट गहराया: कर्मचारियों के वेतन पर संकट, अक्टूबर की सैलरी देरी से मिली, नवंबर का अब तक इंतज़ार

कोल इंडिया की सहायक इकाई ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रही है। नतीजतन, कर्मचारियों को वेतन समय पर नहीं मिल पा रहा है। अक्टूबर महीने का वेतन कई दिनों की देरी के बाद नवंबर में मिला, जबकि नवंबर का वेतन अब तक जारी नहीं हुआ है।

सूत्रों के अनुसार ECL द्वारा बेचे गए कोयले का खरीदारों पर लगभग 2000 करोड़ रुपये का बकाया है, जिसके चलते आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है। ECL के निदेशक नीलाद्री राय ने एक दैनिक अखबार से बातचीत में बताया कि 2000 करोड़ की बकाया राशि में से 500 करोड़ रुपए केवल डीवीसी पर बकाया है, इसी कारण वेतन भुगतान प्रभावित हो रहा है।

कंपनी की 73 कोलरियों में करीब 45,000 स्थाई कर्मचारी कार्यरत हैं। अधिकारी फिलहाल स्पष्ट रूप से यह बताने की स्थिति में नहीं हैं कि नवंबर का वेतन कब मिलेगा।

कोयला बिक्री, उत्पादन और ट्रांसपोर्टेशन पर भी असर

ECL प्रतिदिन औसतन 1.80 लाख टन से 2 लाख टन कोयला उत्पादन करता है, लेकिन हाल में ट्रांसपोर्टेशन घटकर मात्र 1.20 लाख टन रह गया है।

विभिन्न डिपो और रेल साइडिंग पर लगभग 6.5 लाख टन कोयला स्टॉक के रूप में पड़ा है, जिससे अधिक मात्रा में कोयला भंडारण के कारण आग लगने का खतरा भी बढ़ा है।

पावर प्लांट्स की कम मांग और नए कोल ब्लॉक्स से स्थिति बदली

नीलाद्री राय के अनुसार इस वर्ष लगभग छह महीने तक बारिश होने से देशभर के पावर प्लांट्स की बिजली मांग कम हो गई।

नियमों के अनुसार मानसून के दौरान पावर प्लांट्स के पास कम से कम 10 दिन का कोयला स्टॉक होना चाहिए, लेकिन इस समय उनके पास एक महीने से भी अधिक कोयला उपलब्ध है।

इसके अलावा पश्चिम बंगाल के थर्मल पावर प्लांट अपने कोल ब्लॉक से ही कोयला उठा रहे हैं, और विभिन्न कंपनियों को नए कोल ब्लॉक मिलने से ECL से कोयला खरीद कम हो गई है।

डीवीसी से भुगतान के बाद मिलेगा वेतन – दावा

वरिष्ठ बीएमएस नेता जयंत चौबे ने बताया कि विदेश से कोयला आयात किए जाने पर वह सस्ता पड़ रहा है और दूसरी तरफ निजीकरण के बाद खदानें बिजली कंपनियों को देने से वे अपनी आवश्यकतानुसार कोयला उपयोग कर शेष को बाजार में बेच देती हैं।

कमर्शियल माइनिंग के चलते सस्ता कोयला उपलब्ध होने से कंपनियां ECL का कोयला लेने में रुचि नहीं दिखा रही हैं।

उन्होंने कहा कि डीवीसी ने शीघ्र भुगतान करने का आश्वासन दिया है और भुगतान मिलते ही कर्मचारियों का वेतन जारी कर दिया जाएगा।

इस मुद्दे को लेकर 8 दिसंबर को कॉर्पोरेट जेसीसी बैठक प्रस्तावित है।

 


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