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आसनसोल के धेमोमेन में रेक का खेल या वर्चस्व की लड़ाई ? इस्तीफे के बाद बढ़ा सियासी तनाव

धेमोमेन में रेक का खेल या वर्चस्व की लड़ाई ? इस्तीफे के बाद बढ़ा सियासी तनाव

आसनसोल के धेमोमेन में रेक का खेल या वर्चस्व की लड़ाई ? इस्तीफे के बाद बढ़ा सियासी तनाव

धेमोमेन में रेक का खेल या वर्चस्व की लड़ाई ? इस्तीफे के बाद बढ़ा सियासी तनाव

आसनसोल के धेमोमेन में रेक का खेल या वर्चस्व की लड़ाई ? इस्तीफे के बाद बढ़ा सियासी तनाव

आसनसोल नगर निगम के 58 नंबर वार्ड स्थित धेमोमेन इलाके में भाजपा के कार्यक्रम के दौरान हुई हिंसक घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना ऐसे समय हुई है जब महज दो दिन पहले वार्ड के तृणमूल पार्षद संजय नोनिया ने अपने पद और पार्टी दोनों से इस्तीफा दिया था। इसके बाद से इलाके में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं।

धेमोमेन में रेक का खेल या वर्चस्व की लड़ाई ? इस्तीफे के बाद बढ़ा सियासी तनाव

आसनसोल के धेमोमेन में रेक का खेल या वर्चस्व की लड़ाई ? इस्तीफे के बाद बढ़ा सियासी तनाव

आसनसोल नगर निगम के 58 नंबर वार्ड के धेमोमेन क्षेत्र केवल राजनीतिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां संचालित रेल साइडिंग और कोयला परिवहन से जुड़े कार्यों को लेकर लंबे समय से विभिन्न समूहों के बीच प्रभाव और नियंत्रण की चर्चा होती रही है। ऐसे में भाजपा के कार्यक्रम के दौरान हुई हिंसा और उसके बाद सुरक्षा कारणों से रेल साइडिंग का कुछ समय के लिए बंद होना कई तरह की अटकलों को जन्म दे रहा है।

हालांकि अभी तक पुलिस या प्रशासन की ओर से इस घटना को सीधे रेल साइडिंग अथवा रेक संचालन के विवाद से जोड़कर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि हिंसा के पीछे रेक कारोबार या रेल साइडिंग पर कब्जे की लड़ाई ही मुख्य कारण है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संजय नोनिया के इस्तीफे के बाद धेमोमेन में शक्ति संतुलन बदलने की स्थिति बनी है। ऐसे में क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिशें तेज हो सकती हैं। भाजपा और तृणमूल के बीच बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा भी तनाव की एक बड़ी वजह मानी जा रही है।

भाजपा का आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान उनके कार्यकर्ताओं पर हमला किया गया। वहीं दूसरी ओर तृणमूल की ओर से अभी तक इस मामले पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और इलाके में केंद्रीय बल तथा अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

फिलहाल दो प्रमुख चर्चाएं सामने हैं—पहली, क्या यह धेमोमेन की रेल साइडिंग और रेक संचालन से जुड़े प्रभाव की लड़ाई है? और दूसरी, क्या संजय नोनिया के इस्तीफे के बाद शुरू हुई राजनीतिक पुनर्संरचना का यह असर है? जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा, लेकिन इतना तय है कि धेमोमेन में हुई यह घटना आने वाले दिनों में स्थानीय राजनीति और आर्थिक गतिविधियों दोनों पर असर डाल सकती है।

अब सभी की निगाहें पुलिस जांच और आने वाले दिनों में धेमोमेन के बदलते राजनीतिक समीकरणों पर टिकी हुई हैं।

 


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