Air Travel 4 Elephants बेंगलुरु से जापान पहुँचे 20 घंटो में चार एशियाई हाथी, सफल अंतरराष्ट्रीय पशु हस्तांतरण बना ऐतिहासिक उपलब्धि

Air Travel 4 Elephants बेंगलुरु से जापान पहुँचे 20 घंटो में चार एशियाई हाथी, सफल अंतरराष्ट्रीय पशु हस्तांतरण बना ऐतिहासिक उपलब्धि
Air Travel 4 Elephants बेंगलुरु से जापान पहुँचे 20 घंटो में चार एशियाई हाथी, सफल अंतरराष्ट्रीय पशु हस्तांतरण बना ऐतिहासिक उपलब्धि भारत ने वन्यजीव संरक्षण एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। बेंगलुरु स्थित बन्नेरघट्टा जैविक उद्यान (Bannerghatta Biological Park) के चार एशियाई हाथी सफलतापूर्वक जापान के हिमेजी सेंट्रल पार्क – सफारी पार्क (Himeji Central Park – Safari Park) पहुँच गए हैं। यह पहली बार है जब इस जैविक उद्यान ने अपने किसी वन्यजीव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थानांतरित किया है, जो देश के वन्यजीव प्रबंधन की दिशा में एक नया मील का पत्थर माना जा रहा है।
Air Travel 4 Elephant
चारों हाथियों — सुरेश (8 वर्ष), गौरी (9 वर्ष), श्रुति (7 वर्ष) और तुलसी (5 वर्ष) — को लंबे समय से प्रशिक्षण और चिकित्सकीय देखभाल के बाद अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए उपयुक्त माना गया। पार्क प्रशासन की ओर से बताया गया कि इस यात्रा को सुरक्षित और सफलतापूर्वक संपन्न करना एक बड़ी चुनौती थी, जिसे विशेषज्ञों की मदद से बखूबी पूरा किया गया।
Air Travel 4 Elephants 20 घंटे की लंबी हवाई और ज़मीनी यात्रा
यह ऐतिहासिक यात्रा 24 और 25 जुलाई 2025 को कतर एयरवेज कार्गो के विशेष बोइंग 777-200F विमान के माध्यम से संपन्न हुई। हाथियों को बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से जापान के ओसाका स्थित कंसाई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक पहुँचाया गया। वहाँ से हाथियों को जमीनी मार्ग द्वारा हिमेजी सेंट्रल पार्क तक ले जाया गया। पूरी प्रक्रिया लगभग 20 घंटे तक चली।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस यात्रा के लिए हाथियों को महीनों पूर्व से विशेष प्रशिक्षण दिया गया था। उनके स्वास्थ्य, व्यवहार और मानसिक स्थिति का निरंतर मूल्यांकन किया गया ताकि यात्रा के दौरान उन्हें किसी प्रकार की परेशानी न हो।
Air Travel 4 Elephants भारत-जापान के बीच पशु विनिमय समझौते के तहत हुआ स्थानांतरण
यह पशु स्थानांतरण सेंट्रल जू अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा अनुमोदित पशु विनिमय समझौते का हिस्सा है। इस समझौते के अंतर्गत बन्नेरघट्टा जैविक उद्यान को जापान से बदले में 4 चीते, 4 जगुआर, 4 प्यूमा, 3 चिंपैंजी और 8 ब्लैक-कैप्ड कैपुचिन बंदर प्राप्त होंगे। यह भारत के जैव विविधता संरक्षण प्रयासों को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है।
Air Travel 4 Elephants विशेषज्ञों की टीम हाथियों के साथ गई जापान
हाथियों की देखभाल और उन्हें नए वातावरण में समायोजित करने के लिए एक विशेषज्ञ टीम को भी जापान भेजा गया है। इस टीम में दो पशु चिकित्सक, चार अनुभवी हाथीपालक, एक पर्यवेक्षक और एक जीवविज्ञानी शामिल हैं। यह दल अगले दो सप्ताह तक जापान में रहकर हाथियों को हिमेजी पार्क में समायोजित कराने में मदद करेगा।
इसके अलावा, हिमेजी सेंट्रल पार्क से एक प्रतिनिधिमंडल भी मई 2025 में भारत आकर बन्नेरघट्टा जैविक उद्यान में 20 दिन का प्रशिक्षण ले चुका है। इस प्रकार दोनों देशों के बीच बेहतर तालमेल और तैयारी के साथ इस अद्वितीय स्थानांतरण को अंजाम दिया गया।
Air Travel 4 Elephants ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 2021 में भी भेजे गए थे हाथी
गौरतलब है कि यह दूसरी बार है जब भारत ने जापान को हाथी भेजे हैं। इससे पूर्व मई 2021 में मैसूर चिड़ियाघर से तीन हाथी — अभय, वसु और सुंदरी — को जापान के तोयोहाशी जू और बॉटेनिकल पार्क में भेजा गया था। वह प्रयास भी सफल रहा था और उसके अनुभवों के आधार पर इस बार की प्रक्रिया को और भी व्यवस्थित बनाया गया।
Air Travel 4 Elephants बन्नेरघट्टा उद्यान के लिए गौरवपूर्ण क्षण
बन्नेरघट्टा जैविक उद्यान के निदेशक और अधिकारियों ने इसे पार्क के इतिहास में एक “गौरवशाली क्षण” बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ वन्यजीव प्रबंधन की नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को भी मजबूती देने वाला कदम है।
इस ऐतिहासिक पहल से यह संदेश जाता है कि भारत न केवल अपने वन्यजीवों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि वैश्विक मंच पर वन्यजीवों के संरक्षण और प्रबंधन मेंभी सक्रिय भूमिका निभा रहा है।





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