Iran America Wars: ईरान-अमेरिका युद्ध पर ट्रंप के विरोधाभासी बयान, बढ़ती उलझन के बीच सामने आए कई संकेत

Iran America Wars: ईरान-अमेरिका युद्ध पर ट्रंप के विरोधाभासी बयान, बढ़ती उलझन के बीच सामने आए कई संकेत
ईरान के साथ जारी युद्ध को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान कई सवाल खड़े कर रहे हैं। एक ओर उन्होंने कहा कि युद्ध तब तक जारी रहेगा जब तक ईरान को पूरी तरह और निर्णायक रूप से पराजित नहीं किया जाता, वहीं दूसरी ओर उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि यह संघर्ष जल्द समाप्त हो सकता है।
सोमवार को रिपब्लिकन सांसदों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और इजरायल के हमलों से अपने लक्ष्य काफी हद तक हासिल कर चुके हैं। हालांकि उनके इस बयान के बाद ईरान ने कड़ा जवाब दिया। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने कहा कि युद्ध कब खत्म होगा, इसका फैसला अमेरिका नहीं बल्कि ईरान करेगा।
ट्रंप के अलग-अलग बयान से बढ़ी भ्रम की स्थिति
युद्ध को लेकर ट्रंप के बयानों में स्पष्टता की कमी नजर आई। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि युद्ध लगभग खत्म होने की स्थिति में है और अमेरिका निर्धारित समय से आगे चल रहा है। जब उनसे पूछा गया कि क्या इसका मतलब है कि सैन्य अभियान जल्द समाप्त हो सकता है, तो उन्होंने कहा कि यह परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
ट्रंप ने कहा कि युद्ध खत्म करना उनके दिमाग में है, लेकिन अंतिम फैसला परिस्थितियों पर ही निर्भर करेगा। उनके इन बयानों के बाद कई विश्लेषकों ने इसे अमेरिका की रणनीतिक उलझन का संकेत बताया है।
ईरान की नई रणनीति
विश्लेषकों का मानना है कि ईरान इस युद्ध को लंबे समय तक खींचने की रणनीति अपना रहा है। उसका लक्ष्य अमेरिका और इजरायल को थकाना है। इसी रणनीति के तहत उसने अपने ड्रोन और मिसाइल हमलों की तीव्रता में बदलाव किया है।
इसके साथ ही ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की कोशिश कर रहा है और खाड़ी के तेल उत्पादक देशों पर हमले कर वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता पैदा कर रहा है। माना जा रहा है कि इसके जरिए ईरान अमेरिका पर दबाव बढ़ाना चाहता है ताकि वह युद्ध से पीछे हटने पर मजबूर हो जाए।
बातचीत के संकेत भी दे रहे ट्रंप
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहली बार ईरान के साथ बातचीत की संभावना से भी इनकार नहीं किया है। फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि बातचीत संभव है, लेकिन यह पूरी तरह शर्तों पर निर्भर करेगी।
उन्होंने कहा कि उन्हें खबर मिली है कि ईरान बातचीत के लिए उत्सुक है। जब उनसे पूछा गया कि क्या वे ईरानी नेताओं से बात करने के इच्छुक हैं, तो उन्होंने कहा कि यह संभव है, लेकिन सब कुछ शर्तों पर निर्भर करेगा।
तेल केंद्रों पर हमलों का वैश्विक असर
ईरान खाड़ी क्षेत्र के देशों को निशाना बना रहा है और दावा कर रहा है कि वहां मौजूद अमेरिकी और इजरायली सैन्य ठिकानों को लक्ष्य बनाया जा रहा है। कतर से लेकर सऊदी अरब तक तेल और गैस संयंत्रों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए जा रहे हैं।
इन हमलों का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जिससे दुनिया भर में ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और दक्षिण कोरिया सहित कई देशों ने ईंधन की राशनिंग की घोषणा की है।
स्थिति को देखते हुए ट्रंप ने बयान दिया कि युद्ध जल्द खत्म हो सकता है। इसके बाद बाजार में गिरावट थमी और उन्होंने रूस से तेल खरीद को लेकर कुछ रियायतों की घोषणा भी की।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी दबाव
युद्ध का असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, युद्ध के पहले दो दिनों में ही अमेरिका ने करीब 5.6 अरब डॉलर के हथियार इस्तेमाल कर लिए थे।
अमेरिकी श्रम सांख्यिकी ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार फरवरी में अमेरिका में 92 हजार नौकरियां कम हो गईं और बेरोजगारी दर 4.4 प्रतिशत तक पहुंच गई।
अमेरिका में महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत पहले से ही बड़ा मुद्दा है। सर्वेक्षणों के मुताबिक ईरान के साथ युद्ध को लेकर अमेरिकी नागरिकों में असंतोष भी बढ़ रहा है। यह स्थिति ट्रंप के लिए राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव तय करेंगे कि अमेरिकी कांग्रेस पर किस पार्टी का नियंत्रण रहेगा।





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