अमेरिकी अदालत में मेटा पर कड़े सवाल, बच्चों में सोशल मीडिया की लत के आरोपों पर जुकरबर्ग से पूछताछ।

अमेरिकी अदालत में मेटा पर कड़े सवाल, बच्चों में सोशल मीडिया की लत के आरोपों पर जुकरबर्ग से पूछताछ।
अमेरिका के लॉस एंजिल्स की एक अदालत में इंस्टाग्राम और फेसबुक की पेरेंट कंपनी मेटा के मालिक मार्क जुकरबर्ग से बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर तीखी पूछताछ की गई। यह सुनवाई सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही तय करने के लिहाज से ऐतिहासिक मानी जा रही है।
सुनवाई के दौरान यह जांच की जा रही है कि क्या मेटा के प्लेटफॉर्म जानबूझकर बच्चों को सोशल मीडिया की लत लगाने के लिए डिजाइन किए गए। जुकरबर्ग ने अदालत में कहा कि कंपनी ने कम उम्र के यूजर्स की पहचान करने की प्रक्रिया में सुधार किया है, हालांकि उम्र सत्यापन अब भी चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ यूजर्स अकाउंट बनाते समय अपनी उम्र गलत बताते हैं, और ऐसे मामलों में कंपनी कार्रवाई करती है।
वादी पक्ष के वकीलों ने सवाल उठाया कि क्या छोटी उम्र के बच्चों से नियमों और शर्तों को समझने की अपेक्षा करना उचित है। एज वेरिफिकेशन को लेकर बार-बार पूछे जाने पर जुकरबर्ग ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि यह प्रक्रिया इतनी जटिल क्यों है।
यह मुकदमा मार्च के अंत तक चलने की संभावना है। जूरी को यह तय करना है कि क्या मेटा और यूट्यूब कैलिफ़ोर्निया निवासी 20 वर्षीय कैली जी.एम. की मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए जिम्मेदार हैं। अदालत में बताया गया कि कैली ने छह साल की उम्र में यूट्यूब, नौ साल की उम्र में इंस्टाग्राम और बाद में टिकटॉक व स्नैपचैट का उपयोग शुरू किया था।
सुनवाई के दौरान कंपनी का एक आंतरिक दस्तावेज़ भी पेश किया गया, जिसमें दावा किया गया कि 2015 में इंस्टाग्राम पर 13 वर्ष से कम उम्र के लगभग 40 लाख यूजर्स थे। अमेरिका में 10 से 12 वर्ष आयु वर्ग के करीब 30 प्रतिशत बच्चे उस समय इंस्टाग्राम का उपयोग कर रहे थे।
अदालत में मौजूद पत्रकारों के अनुसार, जुकरबर्ग शुरुआत में शांत दिखे, लेकिन बाद में उनके हाव-भाव में झुंझलाहट नजर आई। उन्होंने कहा कि आयु सत्यापन के मामले में कंपनी “सही दिशा में” है और समय के साथ नए उपकरण जोड़े जाएंगे।
यह मामला उन हजारों मुकदमों की श्रृंखला का हिस्सा है, जो अमेरिकी परिवारों ने सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ दायर किए हैं। इस सुनवाई से यह तय होगा कि क्या मेटा और गूगल ने अपने प्लेटफॉर्म इस तरह डिजाइन किए कि वे बच्चों के बीच अनिवार्य बन जाएं और इससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।


















Leave a Reply