ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में भारत की भागीदारी, क्या है इसका मतलब? 4 सवाल-जवाब में समझें पूरा मामला।

ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में भारत की भागीदारी, क्या है इसका मतलब? 4 सवाल-जवाब में समझें पूरा मामला
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा गठित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में भारत ने पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) देश के रूप में हिस्सा लिया। इससे पहले निमंत्रण मिलने के बाद भारत ने तुरंत अपनी सहमति नहीं दी थी और दावोस में हुए इसके लॉन्च कार्यक्रम में भी शामिल नहीं हुआ था। एक हफ्ते तक विचार करने के बाद 19 फरवरी को भारत ने वॉशिंगटन में आयोजित पहली बैठक में भागीदारी की। भारत की ओर से वॉशिंगटन डीसी स्थित भारतीय दूतावास में कार्यवाहक राजदूत नामग्या सी खम्पा बैठक में मौजूद रहे।
बैठक में करीब 50 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए, जिनमें 27 पूर्ण सदस्य और अन्य देश ऑब्जर्वर के तौर पर मौजूद थे। भारत की मौजूदगी को इस संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि वह इस मंच के साथ सहयोग के लिए तैयार है, हालांकि उसने अभी पूर्ण सदस्यता नहीं ली है।
Q- बोर्ड ऑफ पीस क्या है?
‘बोर्ड ऑफ पीस’ की घोषणा पिछले महीने दावोस में आयोजित World Economic Forum की वार्षिक बैठक में की गई थी। उस समय ट्रंप ने दावा किया था कि यह संगठन भविष्य में United Nations (UN) को टक्कर दे सकता है।
शुरुआत में इस बोर्ड का उद्देश्य गाजा में इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम की निगरानी करना और पुनर्निर्माण प्रक्रिया में भूमिका निभाना था। बाद में इसके दायरे को बढ़ाकर अन्य वैश्विक संघर्ष क्षेत्रों में शांति और स्थिरता स्थापित करने तक विस्तारित करने की बात कही गई। ट्रंप स्वयं इस बोर्ड के चेयरमैन हैं।
Q- पहली बैठक में क्या हुआ?
वॉशिंगटन में यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस में आयोजित इस बैठक में अजरबैजान, बेलारूस, मिस्र, हंगरी, इंडोनेशिया, इजराइल, जॉर्डन, मोरक्को, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, तुर्किये, यूएई, उज्बेकिस्तान और वियतनाम सहित 27 सदस्य देश शामिल हुए। भारत और यूरोपीय यूनियन समेत अन्य देशों ने ऑब्जर्वर के रूप में भाग लिया।
बैठक में ट्रंप ने घोषणा की कि कजाखस्तान, अजरबैजान, यूएई, मोरक्को, बहरीन, कतर, सऊदी अरब, उज्बेकिस्तान और कुवैत ने गाजा के लिए 7 अरब डॉलर की राहत राशि देने पर सहमति जताई है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका बोर्ड ऑफ पीस के लिए 10 अरब डॉलर देगा, हालांकि इस राशि के उपयोग का विवरण स्पष्ट नहीं किया गया।
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल के कमांडर मेजर जनरल जैस्पर जेफर्स ने जानकारी दी कि मोरक्को, कजाखस्तान, कोसोवो और अल्बानिया ने गाजा में सैनिक भेजने का वादा किया है, जबकि मिस्र और जॉर्डन ने कर्मियों को प्रशिक्षण देने की बात कही है।
इस दौरान यह अटकलें भी सामने आईं कि बोर्ड ऑफ पीस को United Nations Security Council (UNSC) के विकल्प के रूप में पेश किया जा सकता है। इस पर ट्रंप ने कहा कि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर काम करेगा और उसे मजबूत बनाने में सहयोग देगा।
Q- बोर्ड ऑफ पीस पर भारत का क्या रुख रहा?
निमंत्रण मिलने के बाद भारत ने तुरंत अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की थी। दावोस में आयोजित लॉन्च कार्यक्रम में भी भारत शामिल नहीं हुआ था। 12 फरवरी को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि अमेरिका सरकार से निमंत्रण मिला है और भारत इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है।
उन्होंने यह भी कहा था कि भारत पश्चिम एशिया में शांति की दिशा में हर प्रयास का समर्थन करता है। प्रधानमंत्री स्तर पर भी गाजा सहित पूरे क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति की पहलों का स्वागत किया गया है। ऐसे में बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के प्रस्ताव पर विचार चल रहा है।
भारत का पहली बैठक में ऑब्जर्वर के रूप में शामिल होना यह संकेत देता है कि वह इस मंच की गतिविधियों पर नजर रखते हुए सहयोग की संभावनाओं को खुला रखना चाहता है।


















Leave a Reply