आसनसोल में 271 नंबर बूथ पर फर्जी वोटरों का खुलासा, लोगों में आक्रोश

आसनसोल में 271 नंबर बूथ पर फर्जी वोटरों का खुलासा, लोगों में आक्रोश
आसनसोल दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के रानीगंज के ओल्ड इगारा इलाके के 271 नंबर बूथ पर फर्जी वोटरों के नाम शामिल होने का मामला सामने आया है। इस खुलासे के बाद इलाके में राजनीतिक सरगर्मी और लोगों में नाराज़गी देखी जा रही है।
स्थानीय लोगों का दावा है कि इस बूथ की वोटर लिस्ट में मुस्लिम समुदाय के तीन व्यक्तियों के नाम दर्ज हैं, जबकि इस इलाके में मुस्लिम समुदाय का कोई भी व्यक्ति निवास नहीं करता। इस वजह से लोगों के बीच यह सवाल खड़ा हो गया है कि ऐसे व्यक्तियों के नाम वोटर लिस्ट में कैसे आ गए जिनका यहां कोई अस्तित्व ही नहीं है।
भाजपा नेता ने पहले भी दी थी जानकारी
भाजपा के मंडल-4 के सामान्य सचिव उज्ज्वल माझी ने बताया कि उन्होंने इस मामले की जानकारी पहले ही बीडीओ कार्यालय को दी थी। इसके बावजूद वोटर लिस्ट से इन तीनों नामों को नहीं हटाया गया। उनका कहना है कि जिन व्यक्तियों के नाम लिस्ट में दर्ज हैं, वे इस इलाके में कभी देखे तक नहीं गए हैं।
तृणमूल पंचायत सदस्य भी हैरान
इगारा ग्राम पंचायत के 271 नंबर बूथ के 9 नंबर संसदीय क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस के जीते हुए रानीगंज पंचायत सदस्य ने भी इस मामले पर हैरानी जताई है। उन्होंने कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि जिनका इस इलाके में कोई भी अस्तित्व नहीं है, उनका नाम वोटर लिस्ट में कैसे आ सकता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वह इस मामले को फिर से ब्लॉक स्तर के चुनाव आयोग के पास ले जाएंगे ताकि जांच की जा सके।

आसनसोल में 271 नंबर बूथ पर फर्जी वोटरों का खुलासा, लोगों में आक्रोश
स्थानीय लोगों में नाराज़गी
इलाके के लोग इस खुलासे से गुस्से में हैं। उनका कहना है कि राज्य की मुख्यमंत्री जहां यह कह रही हैं कि वोटर लिस्ट से किसी का भी नाम नहीं हटाया जाएगा, वहीं दूसरी ओर वोटर लिस्ट में फर्जी नाम दर्ज होना चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है।
कई सवाल खड़े हुए
इस घटना के सामने आने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं
ये फर्जी वोटर आखिर कौन हैं?
ये किस जगह के रहने वाले हैं?
इनका नाम वोटर लिस्ट में कैसे दर्ज हुआ?
क्या इनके नाम से किसी और इलाके में वोटर कार्ड जारी हुआ है?
लोगों का कहना है कि यदि ये नाम इस इलाके के वोटर लिस्ट में दर्ज हैं, तो संभव है कि देश के किसी और हिस्से में इनके नाम पर वोटर कार्ड बना हो और वहां इनका अस्तित्व हो।
क्या है साजिश के संकेत?
कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मामला महज़ एक गलती नहीं, बल्कि किसी बड़े चुनावी फर्जीवाड़े का हिस्सा हो सकता है। सवाल उठ रहा है कि यदि ये लोग यहां नहीं रहते, तो फिर किसने और क्यों इनके नाम इस बूथ की वोटर लिस्ट में जोड़े?
जांच की मांग तेज
इस मामले में चुनाव आयोग से जांच की मांग उठने लगी है। भाजपा नेता उज्ज्वल माझी का कहना है कि जब उन्होंने पहले ही अधिकारियों को सूचित कर दिया था, तो नाम क्यों नहीं हटाए गए? वहीं, तृणमूल पंचायत सदस्य ने भी साफ कहा है कि मामले की पूरी जांच जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके।
चुनावी पारदर्शिता पर असर
इस तरह के मामले चुनाव की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। स्थानीय लोग चाहते हैं कि न केवल इस बूथ की बल्कि आस-पास के बूथों की भी वोटर लिस्ट की जांच हो, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं और भी फर्जी नाम तो दर्ज नहीं हैं।
अभी भी कई अनुत्तरित प्रश्न
यदि ये लोग इस इलाके में नहीं रहते, तो किस आधार पर इनके नाम वोटर लिस्ट में जोड़े गए?
क्या यह किसी राजनीतिक साजिश का हिस्सा है?
क्या देश के अन्य हिस्सों में इनके नाम से वोट डाले जाते हैं?
आसनसोल के रानीगंज के ओल्ड इगारा 271 नंबर बूथ पर फर्जी वोटरों का खुलासा एक गंभीर मामला है। भाजपा नेता और तृणमूल पंचायत सदस्य दोनों ने ही इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया है। अब देखना यह है कि चुनाव आयोग इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या दोषियों को चिन्हित कर सख्त कार्रवाई होती है।


















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