42 साल पहले का फुटबॉल हादसा: 16 फैंस की मौत, ‘कोलकाता डर्बी’ का काला इतिहास की याद में खेला दिवस।

42 साल पहले का फुटबॉल हादसा: 16 फैंस की मौत, ‘कोलकाता डर्बी’ का काला इतिहास की याद में खेला दिवस।
ईस्ट बंगाल और मोहन बागान की टक्कर बनी त्रासदी, आज भी याद है यह दर्दनाक घटना
भारतीय फुटबॉल का इतिहास कई रोमांचक मुकाबलों से भरा है, लेकिन इसके साथ ही कुछ घटनाएं ऐसी भी हुई हैं जिन्होंने खेल प्रेमियों को गहरा जख्म दिया। इनमें से सबसे बड़ी त्रासदी 42 साल पहले घटी, जब ‘कोलकाता डर्बी’ में हुई भगदड़ ने 16 फुटबॉल प्रेमियों की जान ले ली।

42 साल पहले का फुटबॉल हादसा: 16 फैंस की मौत, ‘कोलकाता डर्बी’ का काला इतिहास की याद में खेला दिवस।
कोलकाता डर्बी का तनाव
16 अगस्त 1980 को ईस्ट बंगाल और मोहन बागान के बीच कलकत्ता फुटबॉल लीग का मुकाबला ईडन गार्डन्स मैदान में खेला गया। इन दोनों क्लबों के बीच प्रतिद्वंद्विता दशकों पुरानी है, जिसे ‘कोलकाता डर्बी’ कहा जाता है। उस दिन करीब 60 से 70 हजार दर्शक मैदान में मौजूद थे और दोनों टीमों के फैंस के बीच तनाव पहले से ही चरम पर था।
मैच का विवाद
मुकाबले के पहले हाफ के 11वें मिनट में ईस्ट बंगाल के डिफेंडर दिलीप पालित ने बागान के खिलाड़ी बिदेश बोस पर खतरनाक टैकल किया। फाउल तो दिया गया लेकिन रेफरी ने कोई कार्ड नहीं दिखाया, जिससे मोहन बागान के समर्थक नाराज़ हो गए।

42 साल पहले का फुटबॉल हादसा: 16 फैंस की मौत, ‘कोलकाता डर्बी’ का काला इतिहास की याद में खेला दिवस।
दूसरे हाफ में स्थिति और बिगड़ गई। इस बार बिदेश बोस ने बदले की कार्रवाई में दिलीप पालित पर फाउल किया। रेफरी ने बोस को सीधे रेड कार्ड दिखा दिया, जिससे बागान समर्थक भड़क उठे। इसके तुरंत बाद दिलीप पालित को भी रेड कार्ड देकर बाहर भेजा गया और यहीं से दोनों पक्षों के फैंस में झगड़ा शुरू हो गया।
स्टेडियम में भगदड़
स्टैंड्स में बैठे ईस्ट बंगाल और मोहन बागान के फैंस आपस में भिड़ गए। आमतौर पर दोनों टीमों के फैंस को अलग-अलग बैठाया जाता था, लेकिन उस दिन वे एक ही हिस्से में मौजूद थे। देखते ही देखते मारपीट शुरू हो गई और हालात बिगड़ गए।
बचने के लिए दर्शकों ने बाहर निकलने की कोशिश की और भगदड़ मच गई। कई लोग गिर पड़े, तो कुछ ने जान बचाने के लिए ऊंचाई से छलांग लगा दी। नतीजा यह हुआ कि 16 लोग अपनी जान गंवा बैठे और दर्जनों घायल हो गए।
मैच और परिणाम
इस त्रासदी के बावजूद मैच 0-0 की बराबरी पर खत्म हुआ। लेकिन हादसे के बाद पूरे सीजन के मैच रद्द कर दिए गए और दोनों क्लबों पर जुर्माना लगाया गया। ईस्ट बंगाल और मोहन बागान के इस मुकाबले को भारतीय फुटबॉल का सबसे काला दिन कहा जाता है।

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फुटबॉल लवर्स डे की शुरुआत
इंडियन फुटबॉल एसोसिएशन (IFA) ने 16 अगस्त के दिन को उन मृतक फैंस की याद में समर्पित कर दिया। तब से हर साल इस दिन को ‘फुटबॉल लवर्स डे’ के रूप में मनाया जाता है। इस मौके पर हजारों प्रशंसक जुटते हैं, श्रद्धांजलि दी जाती है और रक्तदान जैसे सामाजिक कार्य भी किए जाते हैं। उस समय मैदान में खेलने वाले कई खिलाड़ी भी इस आयोजन का हिस्सा बनते हैं और अपने अनुभव साझा करते हैं।
आसनसोल में ‘खेला होबे दिवस’ का आयोजन
खेल और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार और जिला प्रशासन ने शनिवार को आसनसोल के पोला ग्राउंड में ‘खेला होबे दिवस’ का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में जिला सभाधिपति विश्वनाथ बावरी, आसनसोल नगर निगम के डिप्टी मेयर अभिजीत घटक, मेयर परिषद क्रीड़ा संस्कृति गुरुदास चैटर्जी, मेयर परिषद शिक्षा सुब्रत अधिकारी और महकम शासक बिस्वजीत भट्टाचार्य मौजूद रहे।

42 साल पहले का फुटबॉल हादसा: 16 फैंस की मौत, ‘कोलकाता डर्बी’ का काला इतिहास की याद में खेला दिवस।
खेलों का महत्व
आसनसोल में आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मंच से वक्ताओं ने कहा कि खेल केवल शारीरिक विकास के लिए नहीं बल्कि मानसिक मजबूती और सामाजिक एकता के लिए भी जरूरी है।
‘खेला होबे दिवस’ को राज्य सरकार ने खेल प्रतिभाओं को पहचान देने और खेल संस्कृति को मजबूत करने के उद्देश्य से एक वार्षिक उत्सव का रूप दिया है। आसनसोल में इस आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने इसे खास बना दिया।


















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