टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर के बाबरी मस्जिद 6 दिसंबर शिलान्यास ऐलान से बढ़ा राजनीतिक विवाद — देशभर के नेताओं ने जताई कड़ी आपत्ति

टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर के बाबरी मस्जिद 6 दिसंबर शिलान्यास ऐलान से बढ़ा राजनीतिक विवाद — देशभर के नेताओं ने जताई कड़ी आपत्ति
टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर द्वारा मुर्शिदाबाद में 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद का शिलान्यास करने और तीन साल में निर्माण पूरा करने की घोषणा ने देशभर में राजनीतिक भूचाल ला दिया है। उनके इस ऐलान ने बीजेपी, कांग्रेस, हिंदू संगठनों से लेकर कई मुस्लिम नेताओं तक को खुलकर विरोध में खड़ा कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह मुद्दा शांत हो चुका था, लेकिन इस बयान ने फिर से पुराना विवाद सुर्खियों में ला दिया है।
हुमायूं कबीर का बयान और बढ़ा बवाल
हुमायूं कबीर ने कहा कि वे बाबरी मस्जिद का शिलान्यास 6 दिसंबर को करेंगे।
घोषणा के तुरंत बाद कई राजनीतिक दलों और नेताओं ने उनकी तीखी आलोचना की और इसे “वोट बैंक राजनीति” करार दिया।
बीजेपी के नेता बोले — टीएमसी कर रही है तुष्टिकरण
बिहार के मंत्री मंगल पांडेय का हमला
मंगल पांडेय ने कहा कि टीएमसी लगातार हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले काम कर रही है।
उन्होंने ममता बनर्जी पर “घुसपैठियों के वोट पर निर्भर रहने” का आरोप भी लगाया।
राज्यसभा सांसद भीम सिंह ने कहा — टीएमसी अपनी कब्र खुद खोद रही
भीम सिंह ने टिप्पणी की,
“विनाश काले विपरीत बुद्धि… इसी तरह के हथकंडों ने बिहार महागठबंधन का हाल किया, अब टीएमसी का भी यही होगा।”
यूपी के लोनी विधायक — ‘राम की भूमि पर बाबर का नाम बर्दाश्त नहीं’
लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने कहा,
“यह भगवान श्रीराम की भूमि है। जो भी बाबर के नाम पर मस्जिद की बात करेगा, उसे मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।”
उन्होंने दावा किया कि बाबरी मस्जिद “थी ही नहीं” और सुप्रीम कोर्ट ने भी मंदिर होने की पुष्टि की है।
काग्रेस का भी विरोध — ‘पुराने जख्म कुरेदना गलत’
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कहा कि यह विवाद बार-बार उठाना बेहद गलत है।
उन्होंने कहा कि धार्मिक मुद्दों को उछालने के बजाय सरकार को शिक्षा, नौकरी और कल्याण पर ध्यान देना चाहिए।
विहिप का कड़ा बयान — ‘मंदिर वहीं, मस्जिद नहीं’
विहिप प्रवक्ता विनोद बंसल ने सोशल मीडिया पर हुमायूं कबीर और टीएमसी पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी “जिहादी वोट बैंक” को साधने के लिए बाबरी मुद्दा फिर उठा रही है।
क्यों बढ़ सकता है यह विवाद?
सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में अयोध्या विवाद पर अंतिम फैसला सुना दिया था।
राम मंदिर निर्माण पूरा हो चुका है और बाबा के नाम पर नया विवाद देशभर में संवेदनशील माहौल पैदा कर सकता है।
6 दिसंबर की तारीख पहले से ही प्रतीकात्मक है, ऐसे में शिलान्यास की घोषणा को राजनीतिक रूप से अत्यधिक उकसाने वाला माना जा रहा है।
टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर के इस ऐलान ने पश्चिम बंगाल की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर नया विवाद खड़ा कर दिया है। अधिकांश दलों ने इसे “वोट बैंक और भड़काऊ राजनीति” बताया है। अब देखना होगा कि क्या टीएमसी इस मुद्दे पर आधिकारिक रुख स्पष्ट करती है या विवाद और गहराता है।



















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