शुभेंदु की बैठक में तृणमूल के सात प्रतिनिधि पहुंचे, भाजपा की अच्छी राजनीति शुरू !

शुभेंदु की बैठक में तृणमूल के सात प्रतिनिधि पहुंचे, भाजपा की अच्छी राजनीति शुरू !
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की कल्याणी में आयोजित प्रशासनिक बैठक में तृणमूल कांग्रेस के एक सांसद और छह विधायक शामिल हुए। दिलचस्प बात यह रही कि ये सभी प्रतिनिधि उत्तर 24 परगना जिले से थे। इस बैठक को लेकर राज्य की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
मंगलवार को कल्याणी के एपीजे अब्दुल कलाम प्रेक्षागृह में उत्तर 24 परगना, नदिया और हुगली जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री की बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में तीनों जिलों के भाजपा सांसदों और विधायकों के साथ-साथ तृणमूल के कुछ सांसदों और विधायकों को भी आमंत्रित किया गया था। हालांकि सभी तृणमूल जनप्रतिनिधियों को निमंत्रण नहीं मिला था।
बैठक में बारासात की वरिष्ठ तृणमूल सांसद काकली घोष दस्तीदार मौजूद रहीं। उनके अलावा देगंगा के विधायक अनिसुर रहमान विदेश, बादुरिया के बुरहान-उल-मुकद्दीन (लिटन), स्वरूपनगर की बीणा मंडल, बसिरहाट दक्षिण के सुरजीत मित्र (बादल), मिनाखा की उषारानी मंडल और हाड़ोवा के अब्दुल मतीन भी उपस्थित थे।
काकली घोष दस्तीदार की मौजूदगी को खास तौर पर राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाल ही में उन्हें तृणमूल संसदीय दल के मुख्य सचेतक पद से हटाया गया था। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर नाराजगी भरी पोस्ट भी की थी। रविवार को उन्होंने बारासात संगठनात्मक जिला तृणमूल अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दिया था। ऐसे में शुभेंदु अधिकारी की बैठक में उनकी उपस्थिति को लेकर राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि काकली ने संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “प्रशासन सबका होता है।”
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बैठक में कहा कि कुछ विशेष सांसदों और विधायकों को आमंत्रित किया गया था। उन्होंने कहा, “हमने तय किया था कि कुछ विशेष सांसदों को बुलाया जाएगा। विधायकों को भी आमंत्रित किया गया था। उनमें से एक को अपनी बात रखने का अवसर भी मिला।”
दूसरी ओर, कई तृणमूल नेताओं ने दावा किया कि उन्हें बैठक में बुलाया ही नहीं गया। श्रीरामपुर के तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि उन्हें कोई निमंत्रण नहीं मिला। उन्होंने यह भी कहा कि अगर बुलाया भी जाता तो वे नहीं जाते। कल्याण ने भाजपा सरकार को “फासीवादी सरकार” बताते हुए कहा कि जब उनके पार्टी कार्यकर्ता प्रभावित हो रहे हैं तब ऐसी बैठक में जाना उचित नहीं।
हुगली की आरामबाग सांसद मिताली बाग ने भी कहा कि उन्हें बैठक का निमंत्रण नहीं मिला था। वहीं नदिया के कालिगंज की विधायक अलिफा अहमद ने बताया कि उन्हें निमंत्रण मिला था लेकिन पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के कारण वे नहीं जा सकीं।
पलाशीपाड़ा के विधायक रुकबानुर रहमान ने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में कुर्बानी को लेकर समस्या थी, इसलिए वे बैठक में शामिल नहीं हो पाए। मध्यग्राम के विधायक रथीन घोष ने पैर में चोट लगने का कारण बताया। हुगली की चंडीतला विधायक स्वाति खंदकार ने भी पैर टूटने की वजह से अनुपस्थित रहने की बात कही।
अमडांगा के विधायक काशेम सिद्दीकी ने कहा कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर बैठक में हिस्सा नहीं लिया। उनके मुताबिक, “मैंने पार्टी नेत्री से पूछा था, उन्होंने जाने से मना किया, इसलिए नहीं गया।”
कृष्णानगर की तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा से संपर्क नहीं हो सका। पार्टी सूत्रों के अनुसार, वह फिलहाल दिल्ली में हैं।
भाजपा सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर ही तृणमूल प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया था और इसमें कोई राजनीति नहीं है। बैठक में शामिल तृणमूल विधायकों ने भी इसे विकास और प्रशासनिक सहयोग से जुड़ा कदम बताया।
स्वरूपनगर की विधायक बीणा मंडल ने कहा, “मैं अपने विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए प्रशासनिक बैठक में आई हूं।” देगंगा के विधायक अनिसुर रहमान विदेश ने कहा कि उनके क्षेत्र का बड़ा हिस्सा पिछड़ा इलाका है और समग्र विकास के लिए राज्य सरकार का सहयोग जरूरी है।
हालांकि सबसे ज्यादा चर्चा काकली घोष दस्तीदार और विधायक विदेश की उपस्थिति को लेकर हो रही है। राजनीतिक हलकों में इसे तृणमूल के भीतर बदलते समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।





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