ट्रांसजेंडर समाज को मिले समान अधिकार: आसनसोल के कलाकार सुमन चौधरी ने दुर्गा रूप धारण कर दिया समाज को संदेश।

ट्रांसजेंडर समाज को मिले समान अधिकार: आसनसोल के कलाकार सुमन चौधरी ने दुर्गा रूप धारण कर दिया समाज को संदेश
आसनसोल : मोहन सिंह
पश्चिम बंगाल के आसनसोल से एक ऐसा उदाहरण सामने आया है, जिसने समाज की सोच और दृष्टिकोण पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ के रहने वाले नाटककार और कलाकार सुमन चौधरी ने न सिर्फ़ अपने अभिनय से, बल्कि अपने विचारों से भी समाज में नई सोच को जन्म दिया है। उन्होंने कभी राम, कभी काली, कभी सीता और अब मां दुर्गा का रूप धारण कर यह दिखाया कि शक्ति किसी एक लिंग में सीमित नहीं है।

ट्रांसजेंडर समाज को मिले समान अधिकार: आसनसोल के कलाकार सुमन चौधरी ने दुर्गा रूप धारण कर दिया समाज को संदेश
सुमन चौधरी का कहना है कि उनका यह प्रयास केवल कला नहीं, बल्कि ट्रांसजेंडर समाज की पीड़ा और संघर्ष को उजागर करने की कोशिश है। जब उन्होंने महिला वेशभूषा धारण कर अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं, तो कुछ लोगों ने तारीफ की, लेकिन बड़ी संख्या में उन्हें अपशब्दों और अभद्र टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। इसी अनुभव ने उन्हें सोचने पर मजबूर किया कि जो लोग वास्तव में ट्रांसजेंडर हैं, उन्हें समाज में रोज़ाना किस कदर अपमान और तिरस्कार झेलना पड़ता होगा।

ट्रांसजेंडर समाज को मिले समान अधिकार: आसनसोल के कलाकार सुमन चौधरी ने दुर्गा रूप धारण कर दिया समाज को संदेश
अपमान से मिली प्रेरणा
सुमन चौधरी बताते हैं,
“जब मैंने महिला का रूप धारण कर अपनी तस्वीरें पोस्ट कीं, तब सोशल मीडिया पर मुझे लेकर अपमानजनक टिप्पणियाँ की गईं। उस समय मैंने गहराई से महसूस किया कि ट्रांसजेंडर लोगों के साथ रोज़-रोज़ क्या होता है। अगर मैं खुद ट्रांसजेंडर होता, तो यह दर्द और भी गहरा होता।”

ट्रांसजेंडर समाज को मिले समान अधिकार: आसनसोल के कलाकार सुमन चौधरी ने दुर्गा रूप धारण कर दिया समाज को संदेश
यही सोच उन्हें इस निष्कर्ष पर ले आई कि समाज को अब अपनी सोच बदलनी होगी।
अभिनय के ज़रिए सामाजिक संदेश
सुमन चौधरी एक कलाकार के रूप में हमेशा समाज को सकारात्मक संदेश देने का प्रयास करते हैं। इस बार उन्होंने मां दुर्गा का रूप धारण कर यह बताने की कोशिश की है कि दुर्गा की शक्ति हर इंसान में है – चाहे वह पुरुष हो, महिला हो या ट्रांसजेंडर।
उनका मानना है कि अगर शक्ति सभी में समान रूप से बसती है, तो फिर किसी को अलग दृष्टि से क्यों देखा जाए।
ट्रांसजेंडर समाज का संघर्ष
भारत में ट्रांसजेंडर समाज आज भी बराबरी के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है। चाहे शिक्षा हो, रोजगार हो या सामाजिक सम्मान – हर क्षेत्र में उन्हें भेदभाव झेलना पड़ता है। लोग अक्सर उन्हें अपमानित करते हैं और मुख्यधारा से दूर रखने की कोशिश करते हैं।
सुमन चौधरी का यह कदम इस भेदभाव को चुनौती देता है। उनका कहना है कि
“मैं खुद एक पुरुष होकर महिला का रोल निभा रहा हूँ, ताकि लोग समझ सकें कि ट्रांसजेंडर को भी सम्मान मिलना चाहिए। भगवान ने आत्मा सबमें समान दी है, तो हमें भी सबको एक नजर से देखना चाहिए।”
समाज में संदेश की ज़रूरत
आज समाज को सबसे ज़्यादा ज़रूरत है सोच बदलने की। केवल कानून से नहीं, बल्कि जनमानस की मानसिकता से बदलाव लाना होगा। ट्रांसजेंडर को “ना पुरुष, ना महिला” मानकर अलग कर देना गलत है। वे भी इंसान हैं और उन्हें भी वही सम्मान मिलना चाहिए जो बाकी लोगों को मिलता है।
सुमन चौधरी जैसे कलाकार जब मंच से लेकर सोशल मीडिया तक इस संदेश को फैला रहे हैं, तो यह निश्चित तौर पर समाज के लिए एक बड़ा आईना है।
पश्चिम बंगाल के आसनसोल से उठी यह आवाज़ सिर्फ़ एक कलाकार की नहीं, बल्कि पूरे ट्रांसजेंडर समाज की पीड़ा और संघर्ष की प्रतिध्वनि है। सुमन चौधरी का प्रयास दिखाता है कि बदलाव की शुरुआत हम सबको खुद से करनी होगी।
यदि हम सब मिलकर ट्रांसजेंडर समुदाय को सम्मान और अधिकार देंगे, तो समाज सच में मां दुर्गा की उस शक्ति को पहचान पाएगा, जो हर आत्मा में समान रूप से बसती है।



















Leave a Reply