पश्चिम बंगाल सरकार का दावा – तफशिलि जाति वर्ग के विकास के लिए 14 साल में ऐतिहासिक कदम

पश्चिम बंगाल सरकार का दावा – तफशिलि जाति वर्ग के विकास के लिए 14 साल में ऐतिहासिक कदम
रिपोर्ट मोहन सिंह : कोलकाता में सोमवार को नवान्न में आयोजित पश्चिम बंगाल शेड्यूल कास्ट एडवाइजरी काउंसिल की बैठक में राज्य सरकार ने तफशिलि जातिवर्ग के उत्थान और कल्याण के लिए बीते 14 वर्षों में किए गए कार्यों का विस्तार से उल्लेख किया। सरकार का कहना है कि “मां, माटी, मानुष” की नीतियों पर चलते हुए उसने तफशिलि जातिवर्ग के अधिकारों को सुनिश्चित किया है और उनके लिए कई ऐतिहासिक पहल की हैं, जो पूरे देश के लिए एक मिसाल बन चुकी हैं।
बैठक में बताया गया कि 2010-11 में जहां पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग का बजट केवल 160 करोड़ रुपये था, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 1,761 करोड़ रुपये हो गया है। बीते 14 वर्षों में 99 लाख 91 हजार से अधिक तफशिलि जाति प्रमाणपत्र और कुल 1 करोड़ 67 लाख से ज्यादा जाति प्रमाणपत्र (एससी, एसटी और ओबीसी) जारी किए गए हैं। प्रमाणपत्र जारी करने की समय सीमा 8 सप्ताह से घटाकर 4 सप्ताह कर दी गई है।
शिक्षा और छात्रवृत्ति योजनाएं
‘शिक्षाश्री’ योजना के तहत कक्षा 5 से 8 तक के तफशिलि जाति/जनजाति छात्रों को सालाना 800 रुपये की छात्रवृत्ति दी जा रही है। अब तक 1 करोड़ 5 लाख से अधिक छात्रों को 814 करोड़ रुपये से ज्यादा की छात्रवृत्ति दी जा चुकी है। इसके अलावा, 87 लाख 33 हजार छात्रों को लगभग 3,000 करोड़ रुपये की प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप प्रदान की गई है।
राज्य सरकार ने तफशिलि जाति छात्रों के लिए 34 गर्ल्स हॉस्टल, 12 बॉयज हॉस्टल, 28 सेंट्रल हॉस्टल और 97 आश्रम हॉस्टल शुरू किए हैं। अब तक 4 लाख 66 हजार छात्रों के लिए 3,784 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
अन्य प्रमुख योजनाएं
‘सबूज साथी’ योजना: 37 लाख 47 हजार छात्रों को साइकिल दी गई है।

पश्चिम बंगाल सरकार का दावा – तफशिलि जाति वर्ग के विकास के लिए 14 साल में ऐतिहासिक कदम
‘योग्यश्री’ योजना: राज्यभर में 50 कोचिंग सेंटर के जरिए एससी/एसटी छात्रों को डॉक्टर और इंजीनियरिंग की तैयारी कराई जा रही है। हर साल लगभग 1,700 छात्र इसका लाभ उठाते हैं।
सरकारी नौकरियों की तैयारी: हर साल 1,150 छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग मिलती है।
‘डॉ. बी.आर. आंबेडकर मेधा पुरस्कार’: हर साल 750 मेधावी छात्रों को 5,000 रुपये की एकमुश्त राशि दी जाती है।
एजुकेशन लोन: बीते 14 वर्षों में 1,320 छात्रों को आसान शर्तों पर शिक्षा ऋण दिया गया है।
स्किल ट्रेनिंग: 2011 से अब तक 1 लाख 18 हजार युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया, जिनमें से लगभग 71 हजार आत्मनिर्भर हो चुके हैं।
आर्थिक सहायता: 14 वर्षों में लगभग 2 लाख 22 हजार लोगों को ऋण और सब्सिडी से सहयोग किया गया है।
आधारभूत ढांचा और सामाजिक सुरक्षा
22 जिलों में एससी बहुल इलाकों में 31 करोड़ रुपये की लागत से 630 स्मार्ट क्लासरूम और 34 मॉडल कम्युनिटी सेंटर बनाए गए हैं।
‘तफशिलि बंधु’ योजना के तहत अब तक 11 लाख 25 हजार से अधिक लोगों को प्रति माह 1,000 रुपये पेंशन दी जा रही है, जिस पर सरकार ने 6,480 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के लिए राज्यभर के ब्लॉकों और नगरपालिकाओं में लगभग 350 स्थानीय तफशिलि जाति ढाकियों को नियुक्त किया गया है। ‘दुआरे सरकार’ शिविरों से अब तक 32 लाख 37 हजार जाति प्रमाणपत्र, 36,400 से ज्यादा शिक्षाश्री स्कॉलरशिप और 85,700 से अधिक तफशिलि बंधु पेंशन जारी की गई हैं।
विशेष विकास बोर्ड
तफशिलि जातियों के अलग-अलग वर्गों के विकास के लिए 10 विकास बोर्ड बनाए गए हैं, जिनमें मतुआ विकास बोर्ड, बाउड़ी विकास बोर्ड, बागदी विकास बोर्ड, कुरमी विकास बोर्ड, नम:शूद्र विकास बोर्ड और दलित बंधु विकास बोर्ड शामिल हैं। इन बोर्डों को अब तक 136 करोड़ 49 लाख रुपये प्रदान किए गए हैं।
सरकार का संकल्प
राज्य सरकार ने कहा कि वह हमेशा हर नागरिक के साथ खड़ी है और जाति, धर्म, वर्ग या राजनीतिक पहचान से परे सभी के लिए काम करती है। बैठक का समापन “जय बांग्ला” के नारों के साथ हुआ।



















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