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आसनसोल में फिर लौटे कोयला माफिया बेच रहे 3,500 रुपये प्रति टन खोखन घोष मास्टर माइंड पुलिस-एजेंसियां मौन

आसनसोल में फिर लौटे कोयला माफिया बेच रहे 3,500 रुपये प्रति टन खोखन घोष मास्टर माइंड पुलिस-एजेंसियां मौन

आसनसोल में फिर लौटे कोयला माफिया बेच रहे 3,500 रुपये प्रति टन खोखन घोष मास्टर माइंड पुलिस-एजेंसियां मौन

आसनसोल में फिर लौटे कोयला माफिया बेच रहे 3,500 रुपये प्रति टन खोखन घोष मास्टर माइंड पुलिस-एजेंसियां मौन

आसनसोल में फिर लौटे कोयला माफिया बेच रहे 3,500 रुपये प्रति टन खोखन घोष मास्टर माइंड पुलिस-एजेंसियां मौन

आसनसोल में फिर लौटे कोयला माफिया बेच रहे 3,500 रुपये प्रति टन खोखन घोष मास्टर माइंड पुलिस-एजेंसियां मौन पश्चिम बंगाल के औद्योगिक क्षेत्र आसनसोल और उसके आसपास के जिलों में एक बार फिर अवैध कोयला कारोबार धड़ल्ले से शुरू हो चुका है। वह भी तब, जब केंद्रीय एजेंसियों और राज्य पुलिस ने बीते वर्षों में इस पूरे काले कारोबार पर सख्त कार्रवाई की थी। लेकिन अब एक बार फिर कोयला माफिया संगठित तरीके से अवैध उत्खनन और तस्करी को अंजाम दे रहे हैं। इस बार यह धंधा और भी चतुराई से, “साइलेंट मोड” में चल रहा है।

आसनसोल में फिर लौटे कोयला माफिया बेच रहे 3,500 रुपये प्रति टन खोखन घोष मास्टर माइंड पुलिस-एजेंसियां मौन

बड़ी बात यह है कि यह पूरा अवैध कोयला कारोबार, खोखन घोष जैसे कोक भट्ठा मालिकों के सहयोग से संचालित हो रहा है, जो राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे खुलेआम कोयला खपाने का काम कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि 3,500 रुपये प्रति टन की दर से यह अवैध कोयला खरीदा जाता है और उसे कोक भट्ठों में जलाकर वैध बना दिया जाता है। इसके बाद इसे दुर्गापुर समेत अन्य औद्योगिक क्षेत्रों की फैक्ट्रियों में ऊंचे दामों पर सप्लाई कर दिया जाता है।

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सूत्रों के मुताबिक, कुलटी थाना क्षेत्र के बोडरा और सलानपुर इलाकों में बीसीसीएल और ईसीएल की ओसीपी माइंस से रात के अंधेरे में ट्रैक्टर और साइकिल के माध्यम से कोयला निकाला जाता है। इन खदानों पर पिंटा और मुमताज़ नाम के कुख्यात माफिया सक्रिय थे, लेकिन अब एक नया नाम सामने आया है—नवीन सिंह। कहा जाता है कि नवीन हत्या के आरोप में जेल जा चुका है और अब वह इस अवैध धंधे में फिर से उतर आया है।

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इसके अलावा बॉबी और असरफ नामक दो अन्य माफिया भी बोडरा स्थित खदानों पर कब्जा जमाए हुए हैं। ये सभी मिलकर कोयले की तस्करी की जटिल श्रृंखला चला रहे हैं, जिसमें न सिर्फ खदान से कोयला निकालना, बल्कि उसे कानूनी रूप देने तक का पूरा नेटवर्क शामिल है।

इस नेटवर्क का सबसे अहम किरदार है—संजय साव, जिसे “सेटिंग मास्टर” के नाम से जाना जाता है।

स्थानीय सूत्रों की मानें तो संजय साव ही सभी एजेंसियों, चाहे वह सीआईएसएफ हो, पुलिस हो या राजनीतिक संपर्क—सब जगह अपनी “सेटिंग” के जरिए मोटी रकम पहुंचाता है। यही वजह है कि कोयला माफिया बेखौफ होकर अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे हैं।

सिर्फ इतना ही नहीं, संजय साव झारखंड से अवैध कोयला लाकर बंगाल में एंट्री करवाने का भी काम करता है। झारखंड से आने वाले ट्रकों से ‘पासिंग’ के नाम पर भारी रकम वसूली जाती है, जिसकी फिर अधिकारियों और नेताओं में “बंदरबांट” की जाती है। यही वजह है कि कोयले की तस्करी पर कोई रोक नहीं लग पा रही है।

स्थिति की गंभीरता इस बात से भी समझी जा सकती है कि कुछ साल पहले जब केंद्रीय एजेंसियों ने छापेमारी कर अवैध खनन रोकने की कोशिश की थी, तब कई माफिया फरार हो गए थे। इलाके में भय और डर का माहौल था, लेकिन अब वे सभी माफिया फिर से सक्रिय हो गए हैं। वे यह जानते हैं कि जांच अभी भी जारी है और गिरफ्तारी कभी भी हो सकती है, फिर भी वे खुल्लम-खुल्ला कारोबार कर रहे हैं।

राजनीतिक स्तर पर भी इस मामले को लेकर चुप्पी बनी हुई है।

न तो सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और न ही केंद्र की भाजपा इस मुद्दे पर कोई सख्त बयान दे रही है। कांग्रेस और सीपीएम का आरोप है कि इस पूरे अवैध कारोबार के पीछे भाजपा और तृणमूल दोनों का “आशीर्वाद” है, इसीलिए कार्रवाई नहीं हो रही।

आसनसोल, रानीगंज, जामुड़िया, कुलटी और बाराबनी—इन तमाम क्षेत्रों में कोयला माफिया बेहद सुनियोजित ढंग से कार्य कर रहे हैं। इनमें कुलटी क्षेत्र सबसे आगे है, जहां सबसे ज्यादा खनन और तस्करी हो रही है।

अब सवाल उठता है कि जब इस अवैध कारोबार की खबर मीडिया से लेकर आम जनता तक को है, तो क्या राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसियां इससे अनजान हैं? या फिर यह सब किसी सुनियोजित मिलीभगत का परिणाम है?

आसनसोल जैसे संवेदनशील औद्योगिक क्षेत्र में अगर कोयला माफिया इस कदर सक्रिय हैं, तो यह प्रशासनिक विफलता ही नहीं, बल्कि भविष्य में और गंभीर अपराधों की नींव भी हो सकती है।

फिलहाल, पूरे इलाके में कोयला तस्करी का कारोबार फिर से पांव पसार चुका है। अब देखना यह होगा कि कब तक प्रशासन इस पर चुप्पी साधे रहता है और क्या कोई बड़ी कार्रवाई फिर से होती है या यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा।


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