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Asansol रामपुर एमवीआई चेकपोस्ट बना ट्रक चालकों के लिए अभिशाप,खुल्लमखुल्ला लूट और मनमानी जुर्माना 32,000 रुपये का 

पीड़ित ड्राइवर की फ़ोटो

Asansol रामपुर एमवीआई चेकपोस्ट बना ट्रक चालकों के लिए अभिशाप,खुल्लमखुल्ला लूट और मनमानी जुर्माना 32,000 रुपये का

Asansol रामपुर एमवीआई चेकपोस्ट बना ट्रक चालकों के लिए अभिशाप,खुल्लमखुल्ला लूट और मनमानी जुर्माना 32,000 रुपये का 

Asansol रामपुर एमवीआई चेकपोस्ट बना ट्रक चालकों के लिए अभिशाप,खुल्लमखुल्ला लूट और मनमानी जुर्माना 32,000 रुपये का 

Asansol रामपुर एमवीआई चेकपोस्ट बना ट्रक चालकों के लिए अभिशाप,खुल्लमखुल्ला लूट और मनमानी जुर्माना 32,000 रुपये का ,पश्चिम बंगाल-झारखंड सीमा पर स्थित रामपुर एमवीआई चेकपोस्ट (पश्चिम बर्दवान) आजकल ट्रक चालकों के लिए किसी डरावने सपने से कम नहीं है। सीतारामपुर के डुबुरडिही चेकपोस्ट से कुछ किलोमीटर दूर चौरंगी मोड़ पर मौजूद यह चेकपोस्ट ट्रक चालकों के लिए नर्क बन चुका है। अवैध वसूली, गैरकानूनी एंट्री और मनमाने जुर्माने की घटनाओं ने यहां की व्यवस्था को कटघरे में ला खड़ा किया है।

Asansol रामपुर एमवीआई चेकपोस्ट बना ट्रक चालकों के लिए अभिशाप

एमवीआई (मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर) के अधिकारी ट्रक चालकों से खुलेआम लूट कर रहे हैं। यदि कोई चालक दलालों के जरिए पैसे देकर अवैध इंट्री नहीं कराता, तो उस पर हजारों, कभी-कभी लाखों रुपये का जुर्माना लगाया जा रहा है। साथ ही ट्रकों को बिना किसी वैध कारण के तीन-तीन दिन तक पार्किंग में खड़ा रखा जाता है। रामपुर एमवीआई की यह पार्किंग अब ‘जेल नुमा’ बन गई है जहां सैकड़ों ट्रक चालक और खलासी दिन-रात परेशानियों से जूझते हैं।

ट्रक चालकों की हालत इतनी बदतर हो चुकी है कि वे खून के आंसू बहाते नजर आते हैं। कई बार ये चालक राज्य सरकार और पश्चिम बंगाल की कानून व्यवस्था को कोसते और बद्दुआ देते देखे जा सकते हैं।

मार्बल लदे ट्रेलर का ताजा मामला बना चर्चा का विषय

Asansol रामपुर एमवीआई चेकपोस्ट बना ट्रक चालकों के लिए अभिशाप की घटना हालिया मामला राजस्थान से मार्बल लादकर आ रहे एक ट्रेलर (नंबर RJ 14 GG 1751) का है, जिसे तीन दिन पहले एमवीआई अधिकारियों ने 3 टन ओवरलोडिंग के आरोप में रोक लिया था। चालक खुर्शीद ने बताया कि अधिकारियों ने 32,000 रुपये का जुर्माना ठोक दिया। जब खुर्शीद ने अधिकारियों से वाहन को तौलने और वजन की पुष्टि करने की मांग की, तो उनकी एक न सुनी गई।

खुर्शीद ने आरोप लगाया की, “मैं जुर्माना देने के लिए तैयार था, लेकिन अगर मेरी गाड़ी वाकई 3 टन ओवरलोड है, तो वह माल मुझे वापस मिलना चाहिए या काटकर दिखाया जाए। लेकिन अधिकारियों ने कहा, जुर्माना भरो और जाओ, बाकी कुछ नहीं मिलेगा।”

सोमवार को जब खुर्शीद ने आसनसोल कोर्ट से एक अधिवक्ता बुलाया, तो एमवीआई अधिकारियों ने उनके साथ भी दुर्व्यवहार किया। मंगलवार को कुछ स्थानीय लोगों ने चेकपोस्ट के बाहर प्रदर्शन किया, जिसके बाद मीडिया मौके पर पहुंची। जैसे ही मीडिया ने सवाल उठाए, अधिकारियों ने जल्दबाज़ी में सिर्फ 6,200 रुपये लेकर ट्रक छोड़ने की बात कही।

 

Asansol रामपुर एमवीआई चेकपोस्ट बना ट्रक चालकों के लिए अभिशाप इसी विषय पर खुर्शीद का कहना है कि ट्रक तीन दिन तक खड़ा रहा, जिससे नुकसान हुआ। जानकारी के मुताबिक, किसी भी कमर्शियल वाहन को बिना वैध कारण के इतनी देर तक रोकना नियमों के खिलाफ है। लेकिन रामपुर एमवीआई चेकपोस्ट पर अधिकारी खुद को नियमों से ऊपर समझते हैं।

दलालों के जरिए हो रही अवैध एंट्री, एमवीआई की भूमिका पर सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां दलालों के जरिए ओवरलोड और ओवरहाइट गाड़ियों की अवैध एंट्री कराई जाती है। इसके पीछे सीधा संबंध एमवीआई अधिकारियों से होता है। जो वाहन इस व्यवस्था का हिस्सा नहीं बनते, उनके खिलाफ मनमाने ढंग से जुर्माना लगाया जाता है।

यह भी बताया गया है कि एमवीआई की पेट्रोलिंग गाड़ियां अक्सर ट्रकों का पीछा करते हुए दुर्घटनाएं कर बैठती हैं। ऐसे कई मामलों में देखा गया है कि हादसे के बाद एमवीआई की गाड़ियां मौके से फरार हो जाती हैं। यह घटनाएं यह दर्शाती हैं कि ट्रक चालकों की सुरक्षा पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

अधिकारियों की चुप्पी और सरकार से सवाल

जब इस विषय पर रामपुर एमवीआई अधिकारियों से सवाल किया गया, तो उन्होंने बात को टालने की कोशिश की और गोलमोल जवाब दिए। एक अधिकारी ने कहा, “यह दूसरे शिफ्ट की ड्यूटी थी”, और खुद को जिम्मेदारी से अलग कर लिया।

स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की है कि इस तरह की लूट-खसोट पर तुरंत लगाम लगाई जाए। उनका कहना है कि एमवीआई जैसे सरकारी विभाग के कुछ अधिकारी राज्य सरकार की छवि को खराब कर रहे हैं।

रामपुर एमवीआई चेकपोस्ट पर जो कुछ भी हो रहा है, वह सिर्फ ट्रक चालकों की समस्या नहीं है, बल्कि यह कानून व्यवस्था की गंभीर अनदेखी का संकेत है। यह एक बड़ा सवाल बन गया है कि क्या राज्य सरकार इस खुली लूट और ट्रक चालकों के शोषण पर चुप्पी साधे रहेगी, या फिर सख्त कदम उठाकर इस अराजकता पर नियंत्रण करेगी?

अब देखना यह है कि क्या सरकार इस ‘खुल्लमखुल्ला लूट’ पर अंकुश लगाने के लिए कोई ठोस कार्रवाई करती है, या फिर ट्रक चालकों की तकलीफें इसी तरह जारी रहेंगी।


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