आवारा कुत्तों की स्मार्ट टैग और QR कोड से होगी पहचान शिमला नगर निगम का बड़ा कदम, लाल कॉलर बनेगा खतरे का संकेत

आवारा कुत्तों की स्मार्ट टैग और QR कोड से होगी पहचान शिमला नगर निगम का बड़ा कदम, लाल कॉलर बनेगा खतरे का संकेत
शिमला: नगर निगम शिमला ने शहर में बढ़ती आवारा और हमलावर कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए एक अनोखी पहल शुरू की है। इस अभियान के तहत उन कुत्तों को लाल रंग का कॉलर पहनाया जाएगा, जो पहले कई बार लोगों को काट चुके हैं या जिनमें आक्रामकता की प्रवृत्ति पाई गई है। यह लाल कॉलर लोगों के लिए खतरे का संकेत होगा, ताकि वे सतर्क रह सकें और हमलावर कुत्तों से दूरी बना सकें।
स्मार्ट टैग और QR कोड से होगी पहचान
इस अभियान की खासियत यह है कि प्रत्येक कॉलर में स्मार्ट टैग और QR कोड भी लगाया जा रहा है। QR कोड को स्कैन करने पर कुत्ते की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, नसबंदी और एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन की जानकारी उपलब्ध होगी। इससे नगर निगम को न केवल लावारिस कुत्तों का डाटा बेस तैयार करने में मदद मिलेगी, बल्कि उनकी नियमित निगरानी और नियंत्रण भी किया जा सकेगा।
रंग-बिरंगे कॉलर से होगी अलग पहचान
जहां हमलावर कुत्तों को लाल कॉलर पहनाया जा रहा है, वहीं अन्य आवारा कुत्तों को हरे, नीले और अलग-अलग रंगों के कॉलर दिए जाएंगे। इससे यह पहचान आसान होगी कि कौन-सा कुत्ता लोगों के लिए खतरा है और कौन-सा सामान्य।
अभियान का शुभारंभ और सहयोग
इस अभियान की शुरुआत शिमला शहरी विधायक हरीश जनारथा ने रिज मैदान से की। उन्होंने एक आवारा कुत्ते को कॉलर पहनाकर इसकी औपचारिक शुरुआत की। इस मुहिम में कई सामाजिक संस्थाएं भी सहयोग कर रही हैं, जिनकी टीमें वार्डों में जाकर कुत्तों को कॉलर पहनाने और टैगिंग का कार्य कर रही हैं। अभियान 29 अगस्त तक चलेगा, जिसमें कुत्तों की गणना, वैक्सीनेशन और टैगिंग की जाएगी।

आवारा कुत्तों की स्मार्ट टैग और QR कोड से होगी पहचान शिमला नगर निगम का बड़ा कदम, लाल कॉलर बनेगा खतरे का संकेत
बच्चों में जागरूकता अभियान
विधायक हरीश जनारथा ने बताया कि इस अभियान के तहत स्कूलों में भी जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। बच्चों को यह सिखाया जा रहा है कि वे आवारा कुत्तों से कैसे सुरक्षित रह सकते हैं और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
देश का पहला नगर निगम बना शिमला
शिमला नगर निगम के महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि यह देश का पहला नगर निगम है जिसने इस तरह की पहल शुरू की है। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस से दो साल पहले ही निगम ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया था। उनका कहना है कि इस अभियान से लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और साथ ही शहर में 100% स्टेरलाइजेशन का लक्ष्य भी पूरा किया जा सकेगा।
फीडिंग ज़ोन और जुर्माने की व्यवस्था
महापौर चौहान ने यह भी स्पष्ट किया कि शहर में फीडिंग ज़ोन चिन्हित किए जाएंगे। यदि कोई व्यक्ति इन निर्धारित स्थानों के अलावा कुत्तों को खाना खिलाता है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। इस कदम से शहर में स्वच्छता बनी रहेगी और कुत्तों के एक जगह इकट्ठा होने की समस्या से भी राहत मिलेगी।
अभियान से होने वाले फायदे
1. लोगों को हमलावर कुत्तों से सतर्क रहने में मदद मिलेगी।
2. स्मार्ट टैग और QR कोड से कुत्तों की जानकारी आसानी से उपलब्ध होगी।
3. शहर में आवारा कुत्तों की सही गणना और निगरानी संभव होगी।
4. 100% स्टेरलाइजेशन से कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।
5. बच्चों और आम लोगों में सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ेगी।
शिमला नगर निगम का यह कदम न केवल शहरवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि लावारिस कुत्तों की देखभाल और नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा। लाल कॉलर अब सिर्फ एक रंग नहीं, बल्कि शहर में लोगों के लिए खतरे की घंटी का काम करेगा।





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