आसनसोल में सरकारी बस से जाली नोटों की 500-500 तस्करी का भंडाफोड़, आम की पेटियों के नीचे छिपाकर लाए जा रहे थे 500-500 रुपये के नकली नोट

आसनसोल में सरकारी बस से जाली नोटों की 500-500 तस्करी का भंडाफोड़, आम की पेटियों के नीचे छिपाकर लाए जा रहे थे 500-500 रुपये के नकली नोट
आसनसोल में राज्य पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने एक बार फिर नकली करेंसी के बड़े रैकेट का पर्दाफाश करते हुए गुरुवार सुबह आसनसोल के जुबली मोड़ स्थित एसबीएसटीसी बस डिपो से एक तस्कर को गिरफ्तार किया है। आरोपी मालदा से सरकारी बस के जरिए नकली नोटों की खेप लेकर आसनसोल पहुंचा था। यह तस्करी आम की पेटियों में छिपाकर की जा रही थी।
एसटीएफ की टीम ने खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई करते हुए आरोपी को रंगे हाथों पकड़ा। तलाशी के दौरान आम की पेटियों से लगभग दो लाख रुपये मूल्य के नकली नोट बरामद किए गए, जिनमें अधिकांश 500 रुपये के नोट शामिल हैं।
कैसे मिली सूचना?
सूत्रों के अनुसार एसटीएफ को गुप्त सूचना मिली थी कि मालदा के कालियाचक इलाके से जाली नोटों की एक बड़ी खेप आम की पेटियों में छिपाकर सरकारी बस के माध्यम से आसनसोल भेजी जा रही है। सूचना की पुष्टि होते ही एसटीएफ ने एक टीम को तैयार किया और उसे आम यात्रियों की तरह सिलीगुड़ी से आसनसोल आने वाली सरकारी नाइट सर्विस बस में बैठा दिया गया।
टीम के सदस्य पूरे रास्ते सतर्क रहे और बस के आसनसोल डिपो पहुंचने का इंतजार करते रहे। जैसे ही बस गुरुवार सुबह जुबली मोड़ स्थित एसबीएसटीसी बस डिपो पहुंची, एसटीएफ के अधिकारी अलर्ट हो गए। बस से आम की पेटियों को उतारने आए व्यक्ति को चिन्हित कर लिया गया।
गिरफ्तारी की पूरी कार्यवाही
पेटियों को उठाते ही टीम ने संदेह के आधार पर व्यक्ति को रोका और पेटियों की तलाशी ली। तलाशी के दौरान पाया गया कि आमों के नीचे प्लास्टिक में पैक किए गए जाली नोट छिपाए गए थे। नकली नोटों की मात्रा लगभग दो लाख रुपये थी, और उनमें अधिकांश नोट 500 रुपये के मूल्य वर्ग के थे।
आरोपी को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया और आगे की पूछताछ के लिए आसनसोल उत्तर थाना पुलिस के हवाले कर दिया गया। पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम इस मामले की गहन जांच कर रही है।
गिरोह के तार कहां-कहां जुड़े हैं?
एसटीएफ सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपी इस तस्करी गिरोह का एक छोटा हिस्सा है। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि यह गिरोह बांग्लादेश सीमा से सटे मालदा जिले के कालियाचक क्षेत्र से नकली नोटों को राज्य के अन्य हिस्सों में पहुंचाने का काम कर रहा था।
पुलिस का मानना है कि तस्कर आम की ढुलाई को एक सुरक्षित माध्यम मानते हैं, क्योंकि यह एक आम और सामान्य गतिविधि मानी जाती है, जिससे संदेह कम होता है। यही वजह है कि इस बार नकली नोटों को आम की पेटियों के नीचे छिपाकर भेजा गया।
पुलिस की आगे की कार्रवाई
आसनसोल उत्तर थाने में इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है। गिरफ्तार व्यक्ति से पूछताछ कर यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, नकली नोटों की छपाई कहां होती है और वितरण किन-किन क्षेत्रों में होता है।
पुलिस की एक विशेष टीम इस नेटवर्क के मुख्य सरगना और अन्य सहयोगियों का पता लगाने में जुटी है। वहीं एसटीएफ भी अपनी स्तर पर तकनीकी और गुप्त जानकारियों के माध्यम से गिरोह को पूरी तरह से ध्वस्त करने के प्रयास में लगी हुई है।
नकली नोटों का बढ़ता खतरा
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों से पश्चिम बंगाल, खासकर मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे सीमावर्ती जिलों से नकली नोटों की तस्करी के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। इससे पहले भी एसटीएफ ने कई बार बड़ी मात्रा में नकली नोट बरामद किए हैं।
नकली नोटों का प्रसार न सिर्फ आर्थिक व्यवस्था के लिए खतरनाक है, बल्कि यह देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए भी एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।
आसनसोल में हुई यह कार्रवाई एसटीएफ की सक्रियता और खुफिया तंत्र की कुशलता का उदाहरण है। नकली नोटों के इस रैकेट का पर्दाफाश होना यह दर्शाता है कि तस्कर नए-नए तरीकों से तस्करी के प्रयास कर रहे हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां भी पूरी सतर्कता से मुस्तैद हैं।
फिलहाल, पुलिस मामले की जांच कर रही है और जल्द ही इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी संभव मानी जा रही है।





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