टीएमसी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर की सीट बदलेगी, विधानसभा में नई व्यवस्था की तैयारी — अंदरूनी सूत्रों की पुष्टि

टीएमसी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर की सीट बदलेगी, विधानसभा में नई व्यवस्था की तैयारी — अंदरूनी सूत्रों की पुष्टि
पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस से निलंबित मुर्शिदाबाद के भरतपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक हुमायूं कबीर की सीट बदलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने सोमवार को इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि निलंबन के बाद सदन में उनकी बैठने की जगह में बदलाव किया जाएगा।
हुमायूं कबीर को बाबरी मस्जिद का शिलान्यास करने से जुड़े विवादित फैसले के बाद पार्टी ने निलंबित किया था। विधानसभा सूत्रों के अनुसार उन्हें सदन में निलंबित टीएमसी विधायक पार्थ चटर्जी के बगल में बैठाया जा सकता है। पार्थ चटर्जी को 2022 में शिक्षा विभाग भर्ती घोटाले में ईडी द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद निलंबित किया गया था। जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने हाल ही में फिर से विधानसभा सत्र में शामिल होने की इच्छा जताई थी।
टीएमसी विधायक दल के मुख्य सचेतक निर्मल घोष ने कहा कि पार्टी इस मामले पर लगातार नजर रख रही है और निलंबित विधायकों की सीट व्यवस्था पर फैसला जल्द लागू किया जाएगा।
निलंबन के बाद हुमायूं कबीर ने रविवार को चौंकाने वाला यू-टर्न लेते हुए कहा कि वे विधायक पद से इस्तीफा नहीं देंगे, बल्कि विधानसभा सत्र में भाग लेंगे, क्योंकि — “भरतपुर की जनता नहीं चाहती कि हम इस्तीफा दें।”
सूत्रों का कहना है कि शीतकालीन सत्र और अंतरिम बजट सत्र से पहले टीएमसी विधायक दल ने कबीर की सीट बदलने का निर्णय इसलिए लिया है ताकि शेष विधायकों से सुरक्षित दूरी बनाए रखी जा सके। पार्टी को आशंका है कि कबीर यदि पहले की तरह दल के साथ बैठे तो वे सत्र के दौरान अपने बयानों से पार्टी leadership को असहज करने की कोशिश कर सकते हैं।
वर्तमान घटनाक्रम ने ममता बनर्जी और पार्टी नेतृत्व के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है, खासकर तब जब विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल समाप्ति के करीब है और जल्द ही अंतिम बजट सत्र आयोजित होना है।
मुख्य बिंदु
- टीएमसी से निलंबन पर हुमायूं कबीर की सीट बदलेगी
- पार्थ चटर्जी के बगल में बैठाए जाने की संभावना
- शीतकालीन और अंतरिम बजट सत्र से पहले फैसला लागू
- इस्तीफा न देने का कबीर का यू-टर्न
- पार्टी को आशंका — सदन में कबीर के बयानों से बढ़ सकती है असहजता
यह कदम पार्टी के भीतर चल रहे तनावपूर्ण माहौल और आगामी सत्रों को सुचारू रखने की रणनीति से जुड़ा माना जा रहा है।



















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