तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक कलह खुलकर आई सामने: अभिषेक बनर्जी को लोकसभा में नेता बनाए जाने के बाद कल्याण बनर्जी ने जताया विरोध

तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक कलह खुलकर आई सामने: अभिषेक बनर्जी को लोकसभा में नेता बनाए जाने के बाद कल्याण बनर्जी ने जताया विरोध
तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक कलह खुलकर आई सामने: अभिषेक बनर्जी को लोकसभा में नेता बनाए जाने के बाद कल्याण बनर्जी ने जताया विरोध तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान एक बार फिर सार्वजनिक हो गई है। तृणमूल सांसद सुदीप बंदोपाध्याय के लंबे समय से बीमार रहने के कारण उन्होंने लोकसभा में पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दे दिया। उनकी जगह अब तृणमूल ने सांसद अभिषेक बनर्जी को लोकसभा में पार्टी का नया नेता नियुक्त किया है। लेकिन इसी निर्णय के साथ ही पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया है।
अभिषेक बनर्जी को लोकसभा में तृणमूल संसदीय दल का नेता बनाए जाने के कुछ ही घंटों बाद वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी ने पार्टी के विधायी प्रमुख (Chief Whip) पद से इस्तीफा दे दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने मीडिया के सामने खुलकर नाराजगी भी जाहिर की और अपनी ही पार्टी के सांसदों को आड़े हाथों लिया।
कल्याण बनर्जी का तीखा बयान
मीडिया से बातचीत में कल्याण बनर्जी ने कहा कि पार्टी में कई सांसद ऐसे हैं जो न तो लोकसभा की कार्यवाही में भाग लेते हैं, न ही अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं और न ही कोई जिम्मेदारी निभाते हैं। इसके बावजूद, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उन्हीं सांसदों को तवज्जो देती हैं। उन्होंने कहा, “जिन्होंने कभी संसद में खड़े होकर दो लाइन नहीं बोली, वो आज आगे हैं।”
कल्याण बनर्जी ने तृणमूल नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी के कुछ सांसद केवल दिखावे के लिए हैं और कार्यक्षमता के आधार पर नहीं, बल्कि करीबी संबंधों के आधार पर पद बांटे जा रहे हैं।
सुदीप बंदोपाध्याय की तबीयत और इस्तीफा
वरिष्ठ सांसद सुदीप बंदोपाध्याय पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे, जिस वजह से उन्हें लोकसभा की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी में कठिनाई हो रही थी। उन्होंने इस स्थिति को देखते हुए पार्टी नेतृत्व से इस्तीफे की पेशकश की, जिसे स्वीकार कर लिया गया।

तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक कलह खुलकर आई सामने: अभिषेक बनर्जी को लोकसभा में नेता बनाए जाने के बाद कल्याण बनर्जी ने जताया विरोध
अभिषेक बनर्जी को मिली नई जिम्मेदारी
सुदीप बंदोपाध्याय के इस्तीफे के बाद पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को लोकसभा में तृणमूल का नेता नियुक्त किया गया है। अभिषेक बनर्जी ममता बनर्जी के भतीजे हैं और पार्टी में उनका प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। संसदीय दल की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनका कद और भी बड़ा हो गया है।
राजनीतिक हलकों में हलचल
ईस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बदलाव तृणमूल के भीतर नए और पुराने नेताओं के बीच गहराते मतभेदों की ओर संकेत करता है। कल्याण बनर्जी जैसे वरिष्ठ और अनुभवी नेता की नाराजगी पार्टी के लिए चुनौती बन सकती है।

तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक कलह खुलकर आई सामने: अभिषेक बनर्जी को लोकसभा में नेता बनाए जाने के बाद कल्याण बनर्जी ने जताया विरोध
कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तृणमूल कांग्रेस में अब एक ऐसा दौर शुरू हो गया है, जहां युवा नेतृत्व को आगे लाने की कोशिशों से पुराने नेता खुद को दरकिनार महसूस कर रहे हैं। अभिषेक बनर्जी को लगातार पार्टी में अहम जिम्मेदारियां मिलती जा रही हैं, जबकि पुराने नेताओं को उनकी भूमिका सीमित लग रही है।
पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया का इंतजार
हालांकि तृणमूल कांग्रेस की ओर से अब तक इस पूरे विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है, लेकिन माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व जल्द ही कल्याण बनर्जी को मनाने की कोशिश कर सकती है ताकि विवाद को और न बढ़ाया जाए।
एक ही दिन में दो बड़े घटनाक्रम—अभिषेक बनर्जी की नियुक्ति और कल्याण बनर्जी का इस्तीफा—तृणमूल कांग्रेस के भीतर गंभीर मतभेदों की ओर इशारा कर रहे हैं। इससे न केवल पार्टी की लोकसभा में स्थिति प्रभावित हो सकती है, बल्कि आगामी चुनावी रणनीति और संगठनात्मक ढांचे पर भी असर पड़नेकी संभावना है।





Discover more from PUNJABI POST
Subscribe to get the latest posts sent to your email.













Leave a Reply